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आजादी के बाद भारत में शिक्षा : कुछ उपलब्धियाँ

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भारत में शिक्षा के स्‍तर

ball.gif (1653 bytes) शिक्षा के लिए केन्‍द्र, राज्‍यों और स्‍थानीय निकायों का उत्‍तरदायित्‍व
ball.gif (1653 bytes) नीति संरचना
ball.gif (1653 bytes) भारतीय शिक्षा प्रणाली का आकार
ball.gif (1653 bytes) महत्‍वपूर्ण उपलब्‍धियां
  परिमाणात्‍मक विस्‍तार
  क्षमता निर्माण : राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मानक संस्‍थान
  क्षमता निर्माण : उत्‍कर्ष संस्‍था
 

समावेश

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भारतीय शिक्षा के समक्ष चुनौतियां

 
     
     
 

आजादी के बाद भारत में शिक्षा : कुछ उपलब्धियाँ

 
     
 
 

आजादी के बाद भारत में शिक्षा:  कुछ उपलब्धियाँ 

 

1947     भारत को आजादी प्राप्त हुई।

1948-49 

 

विश्‍वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन : रिपोर्ट प्रस्तुत की

 

1950             

 

भारत एक गणतंत्र बना : नए संविधान में नि:शुल्क एवं

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1951

 

·  दस वर्षो में होने वाली जनगणना में (कुल) साक्षरता दर (5+)18.3%  प्राप्त की गई, (महिलाओं के लिए) 8.9%

· खड़गपुर में प्रथम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना की गई। 

1952-53  

·     माध्यमिक शिक्षा आयोग का गठन, रिपोर्ट प्रस्‍तुत की  

1956

· संसद के अधिनियम द्वारा विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग की स्‍थापना  

· संसद द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी  संस्थान (खड़गपुर) अधिनियम पारित

·पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खडगपुर में प्रथम दीक्षान्त भाषण दिया।

 

1958

दूसरा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई में स्थापित किया गया।

1959

कानपुर एवं चेन्नई में क्रमश: तीसरा एवं चौथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित किया गया।

1961

 

·ष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् की स्‍थापना।

· सभी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए समान विधि कार्यढांचा प्रदान करने हेतु संसद द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम पारित।

·प्रथम दो भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद एवं कोलकाता में स्थापित किए गए।

 

1963

 

पॉंचवा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में स्थापित किया गया।

 

1964-66

 

शिक्षा आयोग की स्‍थापना, रिपोर्ट प्रस्‍तुत की।

 

1968

 

शिक्षा आयोग की सिफारिशों के अनुसरण में प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनाई गई।

 

1963

 

तीसरा भारतीय प्रबंध संस्थान, बंगलौर में स्थापित किया गया।

 

1975

 

छह वर्ष तक के बच्चों का सही विकास करने के लिए समेकित बाल विकास सेवा योजना प्रारम्भ की गई।

 

1976

 

''शिक्षा'' को ''राज्य'' विषय से ''समवर्ती'' विषय में परिवर्तन करने हेतु संविधान में संशोधन किया गया।

 

1984

 

लखनऊ में चौथा भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किया गया।

 

1985

 

संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना।

 

1986

 

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया गया

 

1987-88

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के अनुसरण में केन्द्रीय सहायता प्राप्त अनेक योजनाएं जैसे ''ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड,'' ''शैक्षिक प्रौद्योगिकी'' ''माध्यमिक शिक्षा को व्यवसायोन्मुख बनाना'' इत्यादि प्रारम्भ की गई।

· संसद के अधिनियम द्वारा सांविधिक निकाय के रूप में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद।

·  राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्रारम्भ किया गया

1992

 

आचार्य राममूर्ति समिति द्वारा समीक्षा के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 में संशोधन

 


 

1993

संसद के अधिनियम द्वारा सांविधिक निकाय के रूप में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद्

 

1994

 

·  प्राथमिक शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए चुनिन्दा जिलों में जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया

·उच्चतर शिक्षा की संस्थाओं का मूल्यांकन एवं प्रत्यायन करने के लिए विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (बंगलौर में मुख्यालय) की स्‍थापना

·   तकनीकी संस्थाओं एवं कार्यक्रमों का समय-समय पर मूल्यांकन करने हेतु अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् द्वारा स्थापित राष्ट्रीय मूल्यांकन बोर्ड

·गुवाहाटी में छठे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की स्‍थापना

 

1995

सरकारी एवं अर्ध सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शुरू की गई केन्द्रीय सहायता प्राप्त मध्याह्न भोजन योजना आरम्‍भ की गई, जिसके लिए मफ्त अनाज के रूप में केन्‍द्रीय सहायता दी गई।

1996 

पांचवा आईआईएम कोझीकोड में स्‍थापित किया गया है।

1998

छठा आईआईएम इंदौर में स्‍थापित किया गया।

2001

  • दशकीय जनगणना में साक्षरता दर (7++) 65.4 प्रतिशत (समग्र), 53.7 प्रतिशत (महिला)

  • पूरे देश में गुणवत्‍तापरक प्रारंभिक शिक्षा के सर्वसुलभीकरण हेतु सर्व शिक्षा अभियान आरंभ  किया गया।

  • रूड़की विश्‍वविद्यालय को (सातवें) आई आई टी में परिवर्तित किया गया।

2002 

मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए संविधान में संशोधन किया गया। (लागू होना शेष है)

2003

17 क्षेत्रीय  इंजीनियरिंग कालेजों को राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थानों में परिवर्तित किया गया, केन्‍द्र सरकार द्वारा पूर्णतया वित्‍तपोषित

2004

  • गुणवत्‍तापरक बुनियादी शिक्षा के सर्वसुलभीकरण की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए अतिरिक्‍त वित्‍त सहायता हेतु शिक्षा उपकर लगाया गया।

  • मध्‍याहन भोजन योजना में कुकिंग लागत के लिए भी केन्‍द्रीय सहायता प्रदान करने हेतु इसे संशोधित किया गया।

  • शिक्षा को समर्पित उपग्रह, एडूसैट, छोड़ गया।

2005

संसद अधिनियम द्वारा राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक शैक्षणिक संस्‍था आयोग गठित किया गया।     

2006

कोलकाता और पुणे में दो भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थान स्‍थापित किए गए।    

2007

·        सातवां भारतीय प्रबंध संस्‍थान शिलांग में स्‍थापित किया गया।

·      मोहाली में एक भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थान स्‍थापित किया गया।

·       राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थानों को एक समान सांविधिक अवसंरचना के अंतर्गत लाया गया।

·       राष्ट्रीय संस्‍कृत परिषद गठित की गई।

·      केन्‍द्रीय शैक्षिक संस्‍था (दाखिले में आरक्षण) अधिनियम अधिसूचित किया गया।

 

 

 

 
 

भारत में शिक्षा के स्‍तर

 
 

 

भारत में शिक्षा के स्‍तर और प्रत्‍येक स्‍तर पर छात्रों के संगत आयु वर्ग से संबंधित संकेतक नीचे सूची में दर्शाए गए हैं:

क्र.सं.   

स्‍तर  

     

कक्षा/अवधि (अपवाद सहित, यदि कोई हो)

छात्रों का संगत आयु वर्ग/सांकेतिक

1.

स्‍कूल का स्‍तर

I-XII

6 से 18 वर्ष

 

1.1

प्रारंभिक     

I-VIII (कुछ राज्‍यों में I-VIII

6 से 14 वर्ष 

 

 

1.1.1     

प्राथमिक    

I-V (कुछ राज्‍यों में     I-IV)

6 से 11 वर्ष

 

 

1.1.2     

उच्‍च प्राथमिक

VI-VIII (कुछ राज्‍यों में V-VII)

11 से 14 वर्ष

 

1.2

माध्‍यमिक

IX -XII (कुछ राज्‍यो में VIII-XII)

14 से 18 वर्ष

 

 

1.2.1     

हाई स्‍कूल

IX -X (कुछ राज्‍यो में VIII-X)

14 से 16 वर्ष

 

 

1.2.2     

उच्‍चतर/वरिष्‍ठ माध्‍यमिक स्‍कूल

XI -XII

16 से 18 वर्ष

2.

उच्‍चतर/विश्‍वविद्यालय शिक्षा

 

18 से 24 वर्ष*

 

2.1

गैर व्‍यावसायिक (अर्थात् मानविकी/विशुद्ध विज्ञान /वाणिज्‍य) डिग्री पाठ्यक्रम

 

 

 

 

2.1.1

अवर स्‍नातक

3 वर्ष

 

 

 

2.1.2

स्‍नातकोत्‍तर 

2 वर्ष

 

 

2.2

व्‍यावसायिक डिग्री/डिप्‍लोमा पाठ्यक्रम    

पाठ्यक्रम के आधार पर

 

*विश्‍वविद्यालय/तृतीयक शिक्षा के छात्रों के लिए सामान्‍यतया 18 से 24 वर्ष को संगत आयुवर्ग माना जाता है।
 

 
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शिक्षा के लिए केन्‍द्र, राज्‍यों और स्‍थानीय निकायों का उत्‍तरदायित्‍व

 
 

 

      सरकार के विभिन्‍न स्‍तरों के विभिन्‍न विषयों के उत्‍तरदायित्‍व का आवंटन संविधान में किया गया है। वर्ष 1950 से, जब से संविधान लागू हुआ, वर्ष 1976 तक शिक्षा अनिवार्य तौर पर राज्‍य का विषय था, जिसमें केन्‍द्र सरकार की भूमिका निम्‍नलिखित तक सीमित थी:

      - केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों, प्रशिक्षण और अनुसंधान केन्‍द्रीय संस्‍थाओं और राष्‍ट्रीय महत्‍व की संस्‍थाओं को चलाना, और

      - उच्‍चतर, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के लिए संस्‍थाओं में प्रतिमानकों का समन्‍वय और उनका निर्धारण करना।

 

संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 ने शिक्षा को, सामान्‍य रूप में, ''राज्‍य सूची'' से हटा कर ''समवर्ती सूची'' में डाल दिया, जिससे केन्‍द्र और राज्‍य सरकार दोनों को साथ साथ कार्यक्षेत्र प्रदान कर दिया गया। सहयोग की संकल्‍पना राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के पैरा 3.13 (''एक अर्थपूर्ण भागीदारी'') में की गई थी, जिसे निम्‍नलिखित रूप में पढा जाता है:

 

3.13  संविधान संशोधन, 1976, जिसमें शिक्षा को समवर्ती सूची में शामिल किया गया, राष्‍ट्रीय जीवन के महत्‍वपूर्ण पहलू के संबंध में संघ सरकार और राज्‍यों के मध्‍य उत्‍तरदायित्‍व की नई भागीदारी वास्‍तविक, वित्‍तीय और प्रशासनिक के तात्‍पर्यों हेतु दूरदर्शी कदम था। गुणवत्‍ता और मानकों को बनाए रखा जा सके (सभी स्‍तरों पर शिक्षण व्‍यवसाय में शामिल), विकास के लिए  जनशक्‍ति के संबंध में पूरे देश की शैक्षिक आवश्‍यकताओं के अध्‍ययन और मानीटरन के लिए, अनुसंधान और उच्‍च अध्‍ययन की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए, शिक्षा, संस्‍कृति और मानव संसाधन विकास के अंतर्राष्‍ट्रीय पहलुओं पर ध्‍यान देने के लिए और सामान्‍य तौर पर पूरे देश में शैक्षणिक पिरामिड के सभी स्‍तरों पर उत्‍कृष्‍टता को प्रोत्‍साहन देने के लिए ताकि शिक्षा से संबंधित राज्‍यों की भूमिका और उत्‍तरदायित्‍व में मुख्‍यतया कोई बदलाव नहीं होगा, केन्‍द्र सरकार को शिक्षा के राष्‍ट्रीय और समेकित स्‍वरूप को लागू करने के अपने बडे उत्‍तरदायित्‍व को स्‍वीकार करना होगा। समवर्ती का अर्थ भागीदारी है जो अर्थपूर्ण और चुनौतीपूर्ण है; राष्‍ट्रीय नीति इसको मूल रूप देने का प्रयास है।

 

 संविधान के 72वें और 73वें संशोधन द्वारा, स्‍थानीय स्‍व सरकारी निकायों को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायती राज निकायों और शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निगम निकायों को वर्ष 1993 में संवैधानिक दर्जा दिया गया। इन निकायों के नियत कार्यों को प्रत्‍येक राज्‍य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों द्वारा निर्धारित किया जाएगा। तथापि, संविधान की ग्‍यारहवीं और बारहवीं अनुसूची में इन स्‍थानीय निकायों को कानूनी रूप से सौंपे गए मदों की विस्‍तृत सूची प्रदान की जाती है। ग्‍यारहवीं अनुसूची में पंचायती राज निकायों को अन्‍य बातों के अतिरिक्‍त माध्‍यमिक स्‍तर तक शिक्षा, व्‍यावसायिक शिक्षा और प्रौढ़ तथा अनौपचारिक शिक्षा सौंपी गई है।

 
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नीति संरचना

 
  संविधान

भारत का संविधान शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में राज्‍य नीति के मार्गदर्शन का अंतिम दस्‍तावेज है। संविधान के प्रावधानों का विवरण, जिनका अभिप्राय: शिक्षा से है, ''संवैधानिक प्रावधानों'' के शीर्षक में इस वेबसाइट पर दिया गया है। उनकी मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार है:

o 14 वर्ष की आयु तक के सभी बच्‍चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान।
o सामान्‍य रूप से शिक्षा संघ और राज्‍यों का समान उत्‍तरदायित्‍व है।
तथापि, (क) उच्‍चतर और तकनीकी शिक्षा में मानकों का समन्‍वय और निर्धारण, और (ख) संसद में कानून द्वारा राष्‍ट्रीय महत्‍व की संस्‍थाओं की घोषणा, संघ का उत्‍तदायित्‍व है।
o स्‍थानीय निकायों (पंचायत और नगर निगम) को प्रत्‍येक राज्‍य विधानमंडलों के माध्‍यम से शिक्षा (विशेष रूप से स्‍कूल, प्रौढ़ और अनौपचारिक शिक्षा) में उचित भूमिका प्रदान की जाएगी।
o राज्‍य सरकारों और स्‍थानीय निकायों से शिक्षा के प्राथमिक स्‍तर पर मातृभाषा में निर्देश के लिए सुविधाएं प्रदान करने की आशा की जाती है।

महत्‍वपूर्ण विधान

संविधान के पश्‍चात् कानून द्वारा राज्‍य नीति स्‍पष्‍ट की जाती है। उच्‍चतर शिक्षा विभाग को आवंटित विषयों पर कुछ मुख्‍य केन्‍द्रीय विधान इस प्रकार हैं:

विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अधिनियम, 1987
राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक शैक्षिक संस्‍था परिषद् अधिनियम, 2004 कापीराइट अधिनियम, 1957 प्रशिक्षु अधिनियम, 1961

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

अब तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर मुख्‍यतया दो विस्‍तृत विवरण है, वर्ष 1968 और 1986 के पहले में राष्‍ट्रीय शिक्षा आयोग, 1964-66 की सिफारिशों पर केन्‍द्र सरकार के निर्णय दिए गए हैं और दूसरे में स्‍वर्गीय श्री राजीव गांधी, जो वर्ष 1984-89 के दौरान प्रधानमंत्री थे, की सरकार द्वारा शिक्षा को दी गई नई प्राथमिकता का परिणाम है। वर्ष 1986 की नीति की समीक्षा आचार्य राममूर्ति की अध्‍यक्षता में वर्ष 1990 में गठित समिति द्वारा की गई। समिति की सिफारिशों के आधार पर 1986 की नीति के कुछ प्रावधानों में वर्ष 1992 में संशोधन किया गया। अत: अब शिक्षा पर निम्‍नलिखित तीन विस्‍तृत राष्‍ट्रीय नीतियां है:
o राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1968
o राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986
o राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986, वर्ष 1992 में यथासंशोधित

समय समय पर विशेष मुद्दों पर नीतिगत निर्णय

उपर्युक्‍त वृहद नीतिगत विवरणों के अतिरिक्‍त जब भी आवश्‍यकता है संकल्‍पों, योजनाओं, दिशा-निदेशों, आदेशों आदि के रूप में विशेष मुद्दों पर नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।
 

 
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भारतीय शिक्षा प्रणाली का आकार

 

 

अपनी बिलियन से अधिक जनसंख्‍या और युवाओं के उच्‍च अनुपात के अनुसार भारत की एक वृहद शिक्षा प्रणाली है। इसका लक्ष्‍य समूह (6-24 वर्ष आयुवर्ग में बच्‍चे और युवा) वर्ष 2005 में लगभग 410 मिलियन था अथवा देश की जनसंख्‍या का लगभग 38 प्रतिशत है।

 

   भारत की शिक्षा प्रणाली के आकार के कुछ संकेतक निम्‍नवत हैं (आंकडे वर्ष 2005-06 के हैं, यदि अलग से कहा न गया हो):

 

 

लक्षित जनसंख्‍या

 (6 से 24 वर्ष आयुवर्ग)

 (वर्ष 2005 के अनुसार)

410 मिलियन

सभी शैक्षिक संस्‍थाओं में कुल नामांकन (स्‍कूल से विश्‍वविद्यालय)   

237 मिलियन

शैक्षिक संस्‍थाओं की संख्‍या

 

स्‍कूल 

1.29 मिलियन

कालेज (2005-06) 

20,769     

विश्‍वविद्यालय (31/3/2007 के अनुसार)    

350

(236 विश्‍वविद्यालय + 101 सम विश्‍वविद्यालय+13 राष्‍ट्रीय महत्‍व की संस्‍थाएं)

 

शिक्षकों की संख्‍या  

6.5 मिलियन

 

उक्‍त नामांकन आंकडे यदि अनौपचारिक शिक्षा, जिसका उद्देश्‍य 15 वर्ष से उपर के प्रौढ़ निरक्षरों को शिक्षित करना है, में शामिल नहीं किया जाता है।

 

 
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महत्‍वपूर्ण उपलब्‍धियां

 
  परिमाणात्‍मक विस्‍तार  

 

निम्‍नलिखित आंकडे 1950 में भारत एक गणराज्‍य बनने के बाद से भारतीय शिक्षा के व्‍यापक विकास को दर्शाता है।

क्र.सं.

मद  

1950-51

में आंकडे

2005-06 में आंकडे

(जब तक कि कुछ अन्‍य न कहा जाए)

1.

साक्षरता दर

18.3 %

64.8% (2001)

2.

महिला साक्षरता दर 

8.9%

53.7%

3.

स्‍कूल

0.23 मिलियन

1.28 मिलियन

4

सामान्‍य कालेज    

370

11698

5

व्‍यावसायिक कालेज

208

7797

6

विश्‍वविद्यालय

27

350

7

प्रारम्‍भिक शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात

32.1%

94.85%

8

प्रारम्‍भिक शिक्षा के स्‍तर पर लिंग विभेदता सूचकांक

0.38

0.92

9

शिक्षा पर लोक खर्च जीडीपी के प्रतिशत के रूप में

1.5%

3.46%

 

 

 
 

क्षमता निर्माण : राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मानक संस्‍थान

 
 

निम्‍नलिखित दो मुख्‍य संगठन हैं जिनकी स्‍थापना राष्‍ट्रीय स्‍तर पर की गई है इसका मुख्‍य उद्देश्‍य उच्‍चतर एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में मानदंड एवं स्‍तर का निर्धारण करना तथा उनके अवलोकनों को देखना है।

 

क्र.सं.

क्षेत्र  

राष्‍ट्रीय स्‍तर पर गुणवत्‍ता मानक बनाने के लिए स्‍थापित संस्‍थान

टिप्‍पणियां

1

विश्‍वविद्यालय तथा सामान्‍य कालेज

विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग

सांविधिक निकाय     

 

 

राष्‍ट्रीय मूल्‍यांकन एवं प्रत्‍यायन परिषद 

------

2

तकनीकी एवं प्रबंध शिक्षा 

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद

सांविधिक निकाय

 

 

राष्‍ट्रीय प्रत्‍यायन बोर्ड

 

 

 

 

 

क्षमता निर्माण : उत्‍कर्ष संस्‍था

 

 

दशकों पूर्व से यह विभाग अनेक उत्‍कर्ष संस्‍थाओं को पर्याप्‍त रूप से वित्‍तपोषित या स्‍थापित भी किया है उनमें से कुछ निम्‍न हैं:

 

 

13 भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्‍थान    

 

7 भारतीय प्रबंध संस्‍थान   

 

भारतीय विज्ञान संस्‍थान, बैंगलोर  

 

23 केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालय  

 

भारतीय खनन विद्यालय, धनबाद   

 

4 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्‍थान

 

 

20 राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान     

 

 उक्‍त सूची में मेडिकल, कृषि तथा विधि शिक्षा के क्षेत्र के प्रमुख संस्‍थान, जिसे भारत सरकार के अन्‍य मंत्रालयों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, को शामिल नहीं किया जाता है।

 

 
 

समावेश

 

 

सामान्‍यता, सभी केन्‍द्रीय वित्‍तपोषित संस्‍थाएं लाभवंचित समूहों  से संबंधित छात्रों के लिए निम्‍नलिखित रूप से सीटों का आरक्षण देती है:

 

अन्‍य पिछडा वर्ग

27%

 

अनुसूचित जाति    

15%

 

अनुसूचित जनजाति

7.5%

 

विकलांग    

3%

जवाहर नवोदय विद्यालय, जो देश के 500 से अधिक जिलों में केन्‍द्र सरकार द्वारा स्‍थापित गतिशील स्‍कूल हैं, निम्‍नलिखित वर्गों को उक्‍त के अतिरिक्‍त आरक्षण की व्‍यवस्‍था करता है।

 

बालिका     

33%

 

ग्रामीण बच्‍चे 

75%

 

उक्‍त सीटों के आरक्षण के अतिरिक्‍त अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के बच्‍चों को निम्‍नलिखित अन्‍य सुविधाएं भी सामान्‍यता उपलब्‍ध करायी जाती हैं।

 

 

मैट्रिकोत्‍तर छात्रवृत्‍ति

 

प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग   

 

दाखिला के उपरांत उपचारी कोचिंग 

 

 
 

भारतीय शिक्षा के समक्ष चुनौतियां

 

 

भारत की शिक्षा पद्धति के समक्ष कुछ प्रमुख चुनौतियां निम्‍न प्रकार से हैं:

 

पहुंच 

 

भागीदारी तथा समानता    

 

गुणवत्‍ता

 

प्रासंगिकता  

 

प्रबंधन, और 

 

संसाधन

 

पहुंच - जबकि अब प्रारंभिक स्‍कूलों की उपलब्‍धता दूर दराज तक व्‍यापक रूप से हो गयी है, तथापि माध्‍यमिक स्‍कूलों तथा कालेजों के संबंध में इस स्‍थिति के बारे में नहीं कहा जा सकता है। देश के अनेक दूर दराज के इलाकों में अभी भी माध्‍यमिक स्‍कूल या कालेज इतना दूर है कि सभी का वहां पहुंचाना संभव नहीं है।
संस्‍थानों की भौतिक उपलब्‍धता के अलावा, अन्‍य बाध्‍यताएं जैसे: सामाजिक आर्थिक, भाषा समस्‍या, विकलांगों हेतु भौतिक असुविधाओं आदि को भी दूर करने की आवश्‍यकता है।
भागीदारी एवं समानता - वर्ष 2003-04 में प्रारम्‍भिक, माध्‍यमिक एवं तृतीयक स्‍तर की शिक्षा हेतु सकल नामांकन अनुपात क्रमश: 85%, 39% एवं 9% था। यह भागीदारी अनुपात नि:संदेह बहुत ही कम है और इसे पर्याप्‍त रूप से बढाने की आवश्‍कता है ताकि भारत को एक ज्ञान समाज/अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में विकसित किया जा सके। समानता स्‍थापित करना इससे जुडी हुई चुनौति है। शिक्षा में भागीदारी दर बहुत ही कम है क्‍योंकि लाभवंचित समूह के छात्र अभी भी पढाई करने में दिक्‍कत महसूस कर रहे हैं। यद्यपि उन्‍हें भाग लेने के लिए यह व्‍यवस्‍था की जाती है फिर भी लाभवंचित समूह के बच्‍चे, सामाजिक आर्थिक रूप से पिछडे़ बच्‍चे, विकलांग बच्‍चे आदि को शिक्षा तक पहुंच अन्‍य के मुकाबले बहुत ही कम है। जबकि शिक्षा पद्धति में यह व्‍यवस्‍था करना आवश्‍यक है कि ये बच्‍चे इसे प्राप्‍त करने के लिए सक्षम हों।

गुणवत्‍ता - भारतीय शिक्षा में गुणवत्‍ता की चुनौति अनेक हैं जैसे पर्याप्‍त भौतिक सुविधाएं तथा अवसंरचना, अपेक्षित गुणवत्‍ता से युक्‍त समुचित शिक्षकों को उपलब्‍ध कराना, शिक्षण अध्‍ययन प्रक्रिया का प्रभावीकरण, छात्रों की उपलब्‍धि स्‍तर आदि।
सामान्‍य रूप से हमारी शैक्षिक संस्‍थाओं की गुणवत्‍ता में सुधार की आवश्‍यकता के अतिरिक्‍त, यह भी जरूरी है कि इनमें से अनेक संस्‍थाएं उच्‍च स्‍तरीय मानक को प्राप्‍त करें और उन्‍हें उनकी गुणवत्‍ता के लिए अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मान्‍यता दी जा सके।
प्रासंगिकता - भारत में शिक्षा को दक्षता उन्‍मुख बनाने की आवश्‍यकता है। विशुद्ध अंक गणितीय रूप में, भारत के पास इतनी जनशक्‍ति है कि वह पूरी दूनिया को दक्ष कामगारों की पूर्ति कर सकता है। बशर्ते कि यहां की शिक्षा पद्धति को इस प्रकार बनाया जाए ।
प्रबंधन - भारतीय शिक्षा पद्धति के प्रबंधन का व्‍यापक विकेन्‍द्रीकरण, उत्‍तरदायित्‍व तथा व्‍यवसायीकरण करने की आवश्‍यकता है ताकि यह सभी को अच्‍छी शिक्षा प्रदान कर सके।

संसाधन - भारत की राष्‍ट्रीय नीति जो 1986 से है - में शिक्षा पर खर्च को बढाकर जीडीपी का 6 प्रतिशत तक कर दिया गया है। दूसरी ओर वर्ष 2004-05 में शिक्षा पर केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकारों का खर्च जीडीपी के करीब 3.5 प्रतिशत तक दर्ज किया गया। अत: शिक्षा पर आवंटन में अंतर अभी भी ज्‍यादा है और इसे तत्‍काल पाटने की आवश्‍यकता है।
 

 
 

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