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भाषाएं - योजनाएं
 

 भाषा शिक्षकों को नियुक्त करने के लिए वित्तीय सहायता योजना

 
 

इस योजना के तीन भाग हैं। इसमें --

 

1. अहिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी शिक्षक। इस कार्यक्रम को द्वितीय पंचवर्षीय योजना से कार्यान्वित किया जा रहा है।

 

2. अल्पसंख्यकों की पर्याप्त जनसंख्या वाले जिलों के विद्यालयों में उर्दू शिक्षक। यह योजना वर्ष 1999 से कार्यान्वित की जा रही है, और
 

3. हिन्दी भाषी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के ऐसे विद्यालयों जो अपने यहाँ तृतीय भाषा के शिक्षण के लिए भारतीय आधुनिक भाषा शिक्षकों की मांग करते हैं, की व्यवस्था करने के लिए प्रावधान किया गया है। यह योजना 1993-94 में शुरू की गई।


इस प्रकार की संबंधित योजनाओं को 10वीं योजना में आपस में मिलाया जा रहा है ताकि इन तीनों में बेहतर सम्पर्क बनाया जाए और बेहतर प्रशासनिक कारगरता सुनिश्चित की जा सके। इन योजनाओं के घटकों को भी ज्यों का त्यों रखा गया है।
 

 

(भाग-I)

हिन्दीत्तर भाषी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता योजना

 

प्रस्तावना :
 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 में दिए गए प्रावधानों के अनुसरण में भारत सरकार ने द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान (i) हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति; और (ii) हिन्दीत्तर भाषी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में त्रिभाषा सूत्र को कारगर ढंग से कार्यान्वित करने में सहायता प्रदान करने के लिए इन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेज स्थापित करने/इन्हें सुदृढ़ करने की योजनाएं शुरू की थी। इन योजनाओं के तहत विभिन्न राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को अनुमोदित वित्तीय पैटर्न के आधार पर उच्च प्राथमिक, मिडिल, उच्च विद्यालयों और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में हिन्दी शिक्षकों के नए पदों पर नियुक्ति करने और इन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में उपलब्ध अप्रशिक्षित हिन्दी शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेजों की स्थापना करने/इन्हें सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इन दोनों योजनाओं के उद्देश्य एक ही प्रकार के हैं इसीलिए इन दोनों को आपस में मिलाकर 'हिन्दीत्तर भाषी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता योजना' नामक एक योजना बनाई गई है।

 

उद्देश्य :


इस योजना का उद्देश्य हिन्दीत्‍तर भाषी क्षेत्रों की राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को त्रिभाषा सूत्र के कारगर कार्यान्वयन के लिए अतिरिक्त हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति करके और हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेजों की स्थापना करके/इन्हें सुदृढ़ बनाकर सहायता प्रदान करना है।

 

क्षेत्र :

 

इन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के उच्च प्राथमिक, मिडिल, उच्च विद्यालय और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के अप्रशिक्षित हिन्दी शिक्षकों के लिए हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेजों की स्थापना करने के लिए/इन्हें सुदृढ़ करने के लिए और हिन्दी शिक्षकों के नए पदों पर नियुक्ति करने के लिए हिन्दीत्तर भाषी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को एक योजना अवधि के लिए अनुमोदित पैटर्न के आधार पर केन्द्रीय सहायता अनुमत्य होगी।

 

 

निधियन पैटर्न :

 


हिन्दीत्तर भाषी क्षेत्रों के राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए केवल एक योजना अवधि के लिए ही शत-प्रतिशत आधार पर वित्तीय सहायता अनुमत्य होगी :

 

i)    भारत सरकार के पूर्व अनुमोदन से योजना अवधि के दौरान सृजित किए गए नए पदों पर नियुक्त किए गए हिन्दी शिक्षकों का वेतन/योजना अवधि शुरू होने से पहले सृजित किए गए पदों पर नियुक्त किए गए हिन्दी शिक्षकों का व्यय केन्द्रीय सहायता का पात्र नहीं होगा।

 

ii)    हिन्दीत्तर भाषी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेजों की स्थापना/इन्हें सुदृढ़ करना। इस उद्देश्यार्थ अधिकांश अनुदान अनावर्ती स्वरूप का होगा। कालेज के आवर्ती व्यय को वहन करने का उत्तरदायित्व संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र का होगा। केवल ऐसे राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के नए हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेज स्थापित करने संबंधी प्रस्तावों पर ही विचार किया जाएगा जहाँ हिन्दी शिक्षकों के प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधा नहीं है।

 

एक योजना अवधि के बाद हिन्दी शिक्षकों और हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेज संबंधी व्यय का उत्तरदायित्व संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों का होगा। इनसे यह अपेक्षा होगी कि ये अपने-अपने बजट से अपने स्वयं के संसाधनों से इस उत्तरदायित्व को पूरा करें।

 

प्रक्रिया विधि :

 

हिन्दीत्तर भाषी क्षेत्रों के राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों से यह अपेक्षा होगी कि वे हिन्दी शिक्षकों की मौजूदा स्थिति और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में उपलब्ध अप्रशिक्षित हिन्दी शिक्षकों के प्रशिक्षण की सुविधाओं की समीक्षा करें और अपनी भावी अपेक्षाओं के आधार पर उपयुक्त प्रस्ताव तैयार करें। इस प्रकार तैयार किए गए प्रस्तावों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग), नई दिल्ली द्वारा पर्याप्त समय से पहले भारत सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र हिन्दी शिक्षक प्रशिक्षण कालेजों को स्थापित करने/इन्हें सुदृढ़ करने संबंधी प्रस्ताव को प्रस्तुत करते समय इसकी एक प्रति केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा को भी प्रेषित करेगा जो इसके संबंध में अपनी टिप्पणियों/सिफारिशों के साथ इसे भारत सरकार को अग्रेषित करेगा। भारत सरकार संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन प्राधिकरणों और केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के परामर्श से राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों से प्राप्त प्रस्तावों की जांच करेगी और संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को अपने अनुमोदन के संबंध में सूचित करेगी। भारत सरकार द्वारा अनुमोदित प्रस्ताव के आधार पर संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अनुमोदित कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने की कार्रवाई शुरू करेगा। इसके साथ-साथ भारत सरकार अनुमोदित पध्दति के आधार पर राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन को अनुमोदित कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी बशर्ते संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से पहले प्रदान किए गए अनुदान के पूर्णत: और उपयुक्त उपयोग तथा कार्यान्वयन की प्रगति के बारे में पुष्टि प्राप्त हो जाए। वित्त वर्ष की समाप्ति पर राज्य सरकार भारत सरकार से प्राप्त अनुदान के संबंध में संबंधित महालेखाकार के माध्यम से लेखा परीक्षित लेखाओं को तैयार करेगी और यथाशीघ्र वर्ष के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों के विवरण के साथ लेखाओं के लेखा-परीक्षित विवरण मानव संसाधन विकास मंत्रालय (माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा विभाग) को प्रस्तुत करेगी। आगामी वर्षों के सहायता-अनुदान को भौतिक उपलब्धियों की प्रगति रिपोर्ट के साथ लेखाओं के लेखा परीक्षित विवरण प्राप्त होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

 

 

अनुवीक्षण और मूल्यांकन :

 

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान इस योजना के कार्यान्वयन का अनुवीक्षण और मूल्यांकन करने के लिए उत्तरदायी होगा। इनसे यह अपेक्षा होगी कि ये अन्य बातों के साथ-साथ कोई कमी यदि हो, को दर्शाते हुए तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान से प्राप्त फीडबैक के आधार पर इस योजना के कारगर कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त उपचारात्मक उपाय किए जाएंगे।

 

(भाग-II)

 

राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वित्तीय सहायता और उर्दू शिक्षण के लिए मानदेय प्रदान करने की योजना

 

प्रस्तावना :

 

भारत सरकार ने उर्दू भाषा को प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 1972 में एक समिति गठित की थी। उर्दू के प्रोत्साहन की मांग को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1972 में उर्दू भाषा को प्रोत्साहन देने के लिए तत्कालीन मंत्री श्री आई.के. गुजराल की अध्यक्षता में इससे संबंधित कार्यों और रूपरेखा के लिए एक समिति गठित की थी जिसे उर्दू प्रोत्साहन समिति कहा जाता है। इस समिति ने वर्ष 1975 में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की थी। गुजराल समिति की सिफारिशों के अनुसरण में भारत सरकार ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति और उर्दू शिक्षण के लिए मानदेय प्रदान करने की केन्द्रीय प्रायोजित योजना तत्काल प्रभाव से शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों को उर्दू शिक्षकों के वेतन और विद्यालयों में उर्दू शिक्षण के लिए मौजूदा उर्दू शिक्षकों को मानदेय प्रदान करने के लिए शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।


उद्देश्य :

 

इस योजना का उद्देश्य राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों को विद्यार्थियों को उर्दू पढ़ाने के लिए उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए/मौजूदा शिक्षकों को मानदेय प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि जहां आवश्यक हो उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में उर्दू को प्रोत्साहित किया जा सके।

 

क्षेत्र :

 

इस योजना के तहत योजना अवधि पर ध्यान दिए बिना पाँच वर्ष की अवधि के लिए विद्यालयों में उर्दू शिक्षण के लिए मौजूदा उर्दू शिक्षकों को मानदेय प्रदान करने के लिए और नए पदों पर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को अनुमोदित पैटर्न पर वित्तीय सहायता अनुमत्य होगी।

 

निधियन पैटर्न :


योजना अवधि पर ध्यान दिए बिना राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को पाँच वर्ष की अवधि के लिए निम्नलिखित के लिए शत-प्रतिशत आधार पर वित्तीय सहायता अनुमत्य होगी :
 

i) केन्द्र सरकार ऐसे सभी राज्यों जहाँ शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों की बहुलता है, को राज्य की ओर से की जाने वाली मांग पर ध्यान दिए बिना वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस सहायता के तहत यह परिकल्पना की जाएगी कि इस योजना के तहत अभिनिर्धारित अल्पसंख्यक बाहुल्य ब्लाकों में उर्दू के शिक्षण के लिए प्रति-विद्यालय के एक शिक्षक की लागत को वहन किया जाए।

 

ii) इस योजना की घोषणा से पहले सृजित किए गए पद पर नियुक्त किए गए उर्दू शिक्षकों के वेतन से संबंधित व्यय को केन्द्रीय सहायता के योग्य नहीं माना जाएगा।

 

iii) राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 50,000 रू. प्रति शिक्षक प्रतिवर्ष की दर से वित्तीय सहायता अनुमत्य है।

 

iv) विद्यार्थियों की उर्दू पढ़ाने वाले मौजूदा शिक्षकों को 500 रू. मासिक की एक-समान दर से मानदेय भी अनुमत्य है।

 

v) राज्य/संघ शासित प्रदेशों से की जा रही माँग के बावजूद भी केन्द्रीय वित्तीय सहायता राज्य/संघ शासित प्रदेशों को मानकों के आधार पर प्रदान की जाएगी। बाद के वर्षों में निधियाँ उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के बाद ही जारी की जाएगीं।

 

vi) इस योजना का क्रियान्वयन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पहचान किए गए शैक्षणिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यक ब्लॉकों/जिलों में किया जाएगा।
vii) राज्य/संघ शासित प्रदेशों की सरकारों को वित्तीय सहायता स्वीकार्य अनुदान की 100 प्रतिशत एक किश्त के रूप में किया जाएगा।

 

viii) राज्य सरकारों/संघ शासित प्रशासनों को उर्दू अध्यापकों के वर्तमान पदों तथा उर्दू अध्यापकों हेतु सुविधाओं की आनेवाले वर्षों में अपनी माँग भेजने से पहले समीक्षा करनी होगी।

 

x) उर्दू माध्यम के अध्यापकों के प्रशिक्षण हेतु एक अलग योजना बनाई जाएगी तथा इसे एनसीईआरटी, एससीईआरटी, राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रौन्नयन परिषद, नई दिल्ली तथा भारतीय भाषा केन्द्रीय संस्थान, मैसूर से परामर्श के बाद क्रियान्वित की जाएगी।
 

प्रक्रिया :

 

राज्य सरकारों/संघ शासित प्रशासनों को उचित ढंग से पदों का सृजन करके जारी किए जाने वाले वर्ष के दौरान प्रथम किस्त की निधियों का उपयोग करना होगा। इसके बाद उन्हें उर्दू अध्यापकों के वर्तमान पदों तथा उर्दू अध्यापकों के लिए राज्य/संघ शासित प्रदेश में उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करनी होगी तथा इसके बाद उचित प्रस्ताव तैयार करना होगा। इसके बाद तैयार प्रस्तावों को भारत सरकार के अनुमोदन हेतु दूसरे वर्ष की किस्त प्राप्त करने के प्रस्ताव से काफी पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग (भाषा प्रभाग), शास्त्री भवन, नई दिल्ली-110001 को प्रस्तुत करना होगा। भारत सरकार राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों की जाँच करेगी तथा अपने अनुमोदन के बारे में संबंधित राज्य/संघ शासित प्रदेश को सूचित करेगी। भारत सरकार राज्य/संघ शासित प्रदेश द्वारा पूर्व में जारी किए गए अनुदान के उचित तथा पूर्ण उपयोग तथा क्रियान्वयन में प्रगति की शर्त के विषयाधीन अनुमोदित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार/संघ शासित प्रदेश को अनुमोदित तौर-तरीकों के आधार पर और अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर, राज्य सरकार संबंधित महालेखाकार द्वारा लेखा परीक्षित लेखों का लेखा परीक्षित विवरण मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग) को वर्ष के दौरान प्राप्त की गई वास्‍तविक उपलब्धियों के विवरण सहित प्रस्तुत करेगी। बाद के वर्षों में, सहायता-अनुदान लेखाओं के लेखा परीक्षित विवरण के साथ वास्‍तविक उपलब्धियों की प्राप्ति के विवरण प्राप्त होने के बाद ही दिया जाएगा।

 

(भाग-III)

 

हिन्दी भाषी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में आधुनिक भारतीय भाषा अध्यापकों (हिन्दी को छोड़कर) की नियुक्ति हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने की केन्द्रीय प्रायोजित योजना


भूमिका

 

देश के स्कूलों में भाषा अध्यापन के संबंध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, जिस पर 1986 तथा 1992 की परवर्ती शिक्षा नीतियों में भी जोर दिया गया था, के अनुसार भारत सरकार स्कूल शिक्षा में प्राथमिक स्‍तर के पश्‍चात् तथा माध्यमिक स्तर पर तीन भाषाओं के फार्मूले को क्रियान्वित कर रही है। फार्मूले के अनुसार, हिन्दी भाषी राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों में तीसरी भाषा आधुनिक भारतीय भाषा, विशेष तौर पर दक्षिण भारतीय भाषा (कन्नड़, मलयालम, तमिल एवं तेलगू) होनी चाहिए। इस फार्मूले के पहलू का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, भारत सरकार ने 8वीं योजनावधि के दौरान वर्ष 1993-94 से एक केन्द्र प्रायोजित योजना शुरू करने का निश्चय किया है, जिसके तहत आधुनिक भाषा अध्यापकों (हिन्दी को छोड़कर) की नियुक्ति हेतु 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, विशेषतौर पर हिन्दी भाषी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में आधुनिक भारतीय भाषा की नियुक्ति हेतु यह सहायता प्रदान की जाएगी, यह हिन्दीत्तर क्षेत्रों में हिन्दी भाषा अध्यापकों की नियुक्ति हेतु केन्द्रीय प्रायोजित योजना के समानांतर होगी।

 

उद्देश्य
 

इस योजना का उद्देश्य तीन भाषाओं के फार्मूले के क्रियान्वयन की पहले की योजनाओं को पूरा करने तथा हिन्दी भाषी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों को स्कूलों में तीसरी भाषा एमआईएल, विशेषत: एसआईएल के शिक्षण हेतु जनशक्ति का विकास करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इससे जैसा कि संविधान में कामना की गई है, क्षेत्रीय भाषाओं से हिन्दी का समग्र विकास करने में सहायता मिलेगी। यह तभी संभव होगा जब स्कूलों से अधिक से अधिक हिन्दी भाषी अन्य भारतीय भाषाओं में द्विभाषी बने।


अवसर
 

प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों के लिए केन्द्रीय सहायता 8वीं योजनावधि में वर्ष 1993-94 से नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए उपलब्ध होगी जहाँ प्राथमिक स्‍तर के पश्‍चात् तथा माध्यमिक स्तर पर तीसरी भाषा पढ़ाई जाती है। योजना के तहत केन्द्रीय सहायता हिन्दी भाषी राज्य सरकारों/संघ शासित प्रशासनों के लिए केवल योजनावधि के शुरूआती पाँच वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी जिसके बाद उन्हें अपनी स्वयं की योजना/योजनेत्तर के तहत जिम्मेवारी उठानी होगी। तीसरी भाषा के फार्मूले को ध्यान में रखते हुए, जिसके लिए इस योजना के तहत केन्द्रीय सहायता संस्वीकृत की जाती है, दक्षिण भारतीय भाषा अध्यापकों की नियुक्ति को अधिमान दिया जाएगा। निधियों की उपलब्धता के विषयाधीन अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं में अध्यापकों की नियुक्ति हेतु भी सहायता प्रदान की जा सकती है। 8वीं योजना के शेष भाग में, निधियों के आबंटन के आधार पर प्रत्येक वर्ष कुल 600 एमआईएल अध्यापकों की नियुक्ति हेतु सहायता का प्रस्ताव किया गया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा तथा केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली को आवश्यकता एवं समानुपातिक वितरण के आधार पर सहायता प्रदान की जाएगी।

 

वित्‍त पोषण की प्रणाली तथा चयन/संस्‍वीकृति की प्रक्रिया


आधुनिक भारतीय भाषा विशेष रूप से एस आई एल के अध्‍यापन हेतु राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों द्वारा नियुक्‍त टीजीटी अध्‍यापकों का वेतन तथा भत्‍ते देने के लिए 100 प्रतिशत आधार पर केन्‍द्रीय सहायता संस्‍वीकृत करने की प्रक्रिया निम्‍नानुसार होगी: आधुनिक भारतीय भाषा अध्‍यापकों की भर्ती तथा नियुक्‍ति, भारत सरकार के पूर्व अनुमोदन से प्रति वर्ष सृजित नए पदों के लिए राज्‍य सरकारों/संघशासित प्रदेशों द्वारा की जाएगी। चयन, राज्‍य सरकारों/संघशासित प्रदेशों द्वारा अखिल भारतीय विज्ञापन के आधार पर किया जाएगा। तीसरी भाषा के रूप में आधुनिक भारतीय भाषा के अध्‍यापन के प्रयोजनार्थ अपेक्षित आवश्‍यक योग्‍यताएं केन्‍द्रीय भारतीय भाषा संस्‍थान के साथ विचार विमर्श करके राज्‍य सरकार/संघ शासित प्रशासन द्वारा निर्धारित की जाएगी।


परंतु आधुनिक भारतीय भाषा अध्‍यापकों के लिए भर्ती के नियम तथा अन्‍य शर्ते वही होंगी जो संबंधित राज्‍य सरकारों तथा संघशासित प्रशासन के टीजीटी के लिए होंगी। चयन करते समय उन अध्‍यापकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्‍हें हिन्‍दी का कार्यसाधक ज्ञान होगा। उन अध्‍यापकों को भी प्राथमिकता दी जाएगी जो अनुवाद में कुशल होंगे जिसका उपयोग आधुनिक भारतीय भाषा की प्रोन्‍नति के लिए किया जा सकता है।


राज्‍य/संघशासित प्रशासन-सी आई आई एल- मैसूर के माध्‍यम से निर्धारित प्रोफार्मा (अनुबंध-1) में प्रस्‍ताव भेज सकते हैं जिसमें सृजित किए जाने वाले पदों की  संख्‍या तथा प्रत्‍येक वर्ष स्‍कूल तथा स्‍थान का ब्‍यौरा दिया गया हो। यह आवेदनपत्र अनुमोदन हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आने वाले वित्‍त वर्ष के जनवरी माह तक भेजे जाने चाहिए। उदाहरण के लिए 1994-95 में सृजित किए जाने वाले पदों के प्रस्‍ताव सीआईआईएल के माध्‍यम से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को जनवरी 1994 तक पहुंच जाने चाहिए। मानव संसाधन विकास मत्रालय इस पर विचार करेगा तथा अप्रैल तक उपयुक्‍त मामलों में अनुमोदन देगा। तब राज्‍य अगस्‍त माह तक पद, प्रक्रिया तथा चयनित अध्‍यापकों की सूची विज्ञापित करेंगें। राज्‍य/संघशासित प्रशासन भाषा अध्‍यापन में प्रशिक्षण हेतु चयनित अध्‍यापकों की सूची पूर्ण पते के साथ सीआईआईएल, मैसूर को सितम्‍बर के अंत तक भेजेंगे। 10 प्रतिशत अतिरिक्‍त अध्‍यापकों की एक आरक्षित सूची को वेटिंग लिस्‍ट के रूप में रखा जाता है।उस वर्ष के अक्‍तूबर माह के अंत तक सीआईआईएल चयनित अध्‍यापकों के प्रशिक्षण के लिए औपचारिक दाखिला आदेश जारी करेगा।


राज्‍य सरकारें/संघशासित प्रशासन चयनित अध्‍यापकों की नियुक्‍ति आदेश जारी करेंगे। वे राज्‍य सरकारों के कर्मचारी होंगे तथा उन पर राज्‍य सरकार/संघशासित प्रशासन के अध्‍यापकों के नियम एवं शर्तें लागू होंगी। राज्‍य, उन्‍हें भाषा अध्‍यापन पद्धति तथा अनुवाद पद्धतियों में प्रशिक्षण हेतु सीआईआईएल, मैसूर जाने के निदेश देंगे।


प्रशिक्षण प्रत्‍येक वित्‍त वर्ष के दौरान सीआईआईएल तीन माह के दो अध्‍यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। सीआईआईएल, संबंधित राज्‍य सरकार/संघशासित प्रशासन के साथ विचार करके प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्‍त़ृत समय-सारणी तैयार करेगा। राज्‍य सरकार सीआईआईएल, मैसूर में प्रशिक्षण हेतु चयनित प्रत्‍येक उम्‍मीदवार से एक आश्‍वासन लेंगे कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रम के समाप्‍त होने के पश्‍चात न्‍यूनतम पांच वर्ष की अवधि के लिए संबंधित राज्‍य/संघशासित प्रशासन के शिक्षा विभाग में कार्य करेंगे। ऐसा न करने पर वे सरकार को,  सीआईआईएल में अपने प्रशिक्षण पर खर्च की गई राशि वापस करेंगे। उन्‍हें प्रशिक्षण में आने की तारीख से वेतन दिया जाएगा।


भाषा/स्‍कूलों के चयन के लिए दिशानिर्देश

 

सुकर कार्यान्‍वयन के उद्देश्‍य से प्रत्‍येक राज्‍य सरकार/संघशासित प्रशासन चार दक्षिण भारतीय भाषाओं में से दो का चयन करेंगे तथा दो भाषाओं में से प्रत्‍येक के अंतर्गत जिलों का विभाजन करेंगे।


जिला मुख्‍यालयों में स्‍कूलों का चयन प्रथम चरण में किया जाएगा तथा उसके उपरांत उप-डिविजनल/ब्‍लाक मुख्‍यालय तथा पंचायत समिति और गांव में चयन किया जाएगा। प्रथम प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहां पर सामान्‍य रूप में एमआईएल में तथा विशेष रूप से एसआईएल में उत्‍तर-सेकेण्‍डरी स्‍तर पर आगे अध्‍ययन हेतु कुछ सविधाएं उपलब्‍ध हैं। प्राथमिकता उन स्‍थानों को दी जानी चाहिए जहां पर सामान्‍यत: एमआईएल तथा विशेष रूप से एसआईएल के प्रचार हेतु स्‍वैच्‍छिक संगठन हैं और इन भाषाओं के लिए वातावरण सृजित करते हैं।


कक्षा फर्नीचर तथा अध्‍यापकों के लिए अन्‍य सामग्री जैसी बुनियादी सुविधाएं राज्‍यों/संघशासित प्रशासनों द्वारा उनकी निधियों में से प्रदान की जायेंगी। अपनी भाषा और अध्‍ययन सामग्री तैयार करने हेतु पाठयचर्या का विकास करने के लिए सीआईआईएल, मैसूर की शैक्षिक सहायता का उपयोग किया जाएगा।

 

अनुवीक्षण तथा मूल्‍यांकन


राज्‍य सरकारें/संघशासित प्रशासन अपनी प्रणाली के अनुसार तृतीय भाषा में परीक्षाएं आयोजित करने के लिए उत्‍तरदायी होंगे। वे अपने निरीक्षणकर्ताओं के माध्‍यम से तृतीय भाषा के अनुवीक्षण और स्‍कीम के कार्यान्‍वयन के लिए भी उत्‍तरदायी होंगे। वे इस प्रयोजनार्थ सीआईआईएल, मैसूर की शैक्षिक सहायता ले सकते हैं।


सीआईआईएल, मैसूर, एमआईएल अध्‍यापक स्‍कीम के कार्यान्‍वयन हेतु नोडल एजेंसी होने के कारण कार्यक्रमों का मूल्‍यांकन तथा स्‍कीम का अनुवीक्षण करेंगे तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को वार्षिक रूप से अपनी रिपार्ट प्रस्‍तुत करेंगे।
 

 
 

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प्रख्यान :- नेट पर प्रकाशित की जा रही सामग्री में यदि कोई कमी पाई गई तो उसके लिए न तो एनआईसी और न ही उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय जिम्मेदार है। नेट पर प्रकाशित विषय तत्काल सूचना हेतु है।