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दक्ष मैनपावर के
सृजन, औद्योगिक उत्पादकता में बढ़ोतरी और जीवन गुणवत्ता में सुधार
के माध्यम से देश के मानव संसाधन विकास में तकनीकी शिक्षा अहम
भूमिका निभाती है। तकनीकी शिक्षा में इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी,
प्रबंधन, वास्तुकला, नगर नियोजन, फार्मेसी एवं एप्लाइड आर्ट एंड
क्राफ्ट, होटल प्रबंधन तथा कैटरिंग प्रौद्योगिक पाठयक्रम तथा
कार्यक्रम शामिल हैं।
देश में तकनीकी शिक्षा
पति को तीन वर्गों-नामत: केन्द्र सरकार
वित्तपोषित संस्थान, राज्य सरकार/राज्य वित्तपोषित संस्थान एवं
स्व-वित्तपोषित संस्थान में बांटा जा सकता है। तकनीकी तथा विज्ञान
शिक्षा के 52 केन्द्रीय वित्तपोषित संस्थान निम्न हैं:
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (2008-09 के दौरान 6 नए स्थापित
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित) |
13
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भारतीय प्रबंध संस्थान |
7 |
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भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर |
1 |
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आईआईएसईआर |
5 |
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान |
20 |
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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान |
4 |
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एनआईटीटीटीआर |
4 |
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अन्य
(एसपीए, आईएसएमयू, नेरिस्ट, एसएलआईईटी, एनआईटीआईई एवं
एनआईएफएफटी) |
6
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कुल |
60 |
उपरोक्त
के अलावा, चार प्रशिक्षुता प्रशिक्षण बोर्ड है।
केन्द्र सरकार निम्नलिखित स्कीमों/कार्यक्रमों को भी कार्यान्वित
कर रही है:
1 तृतीय
तकनीकी शिक्षा
परियोजना
2. विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार
कार्यक्रम
3. राष्ट्रीय भूकंप इंजीनियरिंग शिक्षा कार्यक्रम
4. भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी डिजिटल लाइब्रेरी
5. राष्ट्रीय तकनीकी उन्नत अध्ययन कार्यक्रम (एनपीटीईएल)
6. प्रौद्योगिकी विकास मिशन।
इस
मंत्रालय के अंतर्गत एजुकेशन कंसलटेंट इंडिया लिमिटेड (एड.सिल)
नामक एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा
परिषद् एवं वास्तुकला परिषद् (सीओए) नामक उच्च परिषदें भी हैं।
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