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भारत का उच्चतर
शिक्षा तंत्र दुनिया के सबसे बड़े उच्चतर शिक्षा तंत्रों में से एक
है।
देश के उच्चतर शिक्षा
से संबंधित मुख्य नीतियों के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेवार है। यह
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को अनुदान प्रदान करती है तथा देश में
केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना करती है। केन्द्र सरकार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सिफारिशों के आधार पर शैक्षिक
संस्थानों को सम-विश्वविद्यालय के रूप में घोषित करने के लिए
जिम्मेवार है।
राज्य सरकारें राज्य
विश्वविद्यालयों और कालेजों की स्थापना के लिए जिम्मेवार हैं तथा
उनके विकास के लिए योजनागत अनुदान एवं देख-रेख के लिए योजनेतर
अनुदान प्रदान करती हैं।
शिक्षा के क्षेत्र
में केन्द्र तथा राज्यों के बीच सहयोग एवं समन्वय केन्द्रीय शिक्षा
सलाहकार बोर्ड के माध्यम से किया जाता है।
केन्द्र सरकार की
विशेष संवैधानिक जिम्मेदारी: शिक्षा को संविधान की संघीय सूची की
प्रविष्टि
66 के
विषयाधीन एक
'समवर्ती-सूची'
में शामिल
किया गया है। यह केन्द्र सरकार को अनुसंधान या उच्चतर शिक्षा
संस्थानों एवं वैज्ञानिक तथा तकनीकी संस्थानों के स्तर के निर्धारण
तथा समन्वय की विशेष शक्ति प्रदान करता है।
विश्वविद्यालय अनुदान
आयोग समन्वय,
स्तर के
निर्धारण एवं देख-रेख एवं अनुदानों को जारी करने के लिए जिम्मेदार
है। व्यावसायिक परिषदें पाठयक्रमों की पहचान करने,
व्यावसायिक
संस्थानों को प्रोत्साहित करने एवं विभिन्न अवर-स्नातक कार्यक्रमों
तथा विभिन्न पुरस्कारों हेतु अनुदान जारी करने के लिए जिम्मेदार
हैं। सांविधिक व्यावसायिक परिषदें हैं:
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अखिल भारतीय तकनीकी
शिक्षा परिषद (ए.आई.सी.टी.ई.)
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भारतीय मेडिकल परिषद
(एम.सी.आई.)
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भारतीय कृषि अनुसंधान
परिषद (आई.सी.ए.आर.)
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राष्ट्रीय शिक्षक
शिक्षा परिषद (एन.सी.टी.आई.)
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भारतीय दन्त चिकित्सा
परिषद (डी.सी.आई.)
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भारतीय फार्मेसी
परिषद (पी.सी.आई.)
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भारतीय नर्सिंग परिषद
(आई.एन.सी.)
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भारतीय विधिज्ञ परिषद
(बी.सी.आई.)
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केन्द्रीय होम्योपैथी
परिषद (सी.सी.एच.)
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केन्द्रीय भारतीय
औषधियॉं परिषद (सी.सी.आई.एम.)
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वास्तुकला परिषद
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पुनर्स्थापना परिषद
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राज्यों की उच्चतर
शिक्षा परिषद
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