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राष्‍ट्रीय छात्रवृत्‍ति

 
 

कालेज एवं विश्‍वविद्यालय छात्रों के लिए केन्‍द्रीय छात्रवृत्‍ति स्‍कीम   

 राष्‍ट्रीय योग्‍यता छात्रवृत्‍ति स्‍कीम जिसका उद्देश्‍य सरकारी स्‍कूलों/कालेजों तथा विश्‍वविद्यालयों में उत्‍तर मैट्रिक से स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर तक अध्‍ययनरत योग्‍य छात्रों को वित्‍तीय सहायता प्रदान करना था, को अप्रैल, 2007 से समाप्‍त कर दिया गया है। परंतु 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कालेज तथा विश्‍वविद्यालय छात्रों के लिए एक नई केन्‍द्रीय छात्रवृत्‍ति स्‍कीम आरंभ की गई है। नई स्‍कीम का लक्ष्‍य निम्‍न आय वाले परिवारों के योग्‍य छात्रों को वित्‍तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वह उच्‍चतर अध्‍ययन के दौरान अपने दैनिक व्‍यय को पूरा कर सकें।
छात्रवृत्‍तियां वरिष्‍ठ माध्‍यमिक परीक्षा के परिणामों के आधार पर दी जाएंगी। कालेजों तथा विश्‍वविद्यालयों और व्‍यावसायोन्‍मुख पाठ्यक्रम जैसे मेडिकल, इंजीनियरी आदि में स्‍नातक/स्‍नातकोत्‍तर अध्‍ययन के लिए प्रति वर्ष 82000 नई छात्रवृत्‍तियां (41000 बालकों के लिए तथा 41000 बालिकाओं के लिए) प्रदान की जायेंगी।

< स्‍कीम की विस्‍तृत जानकारी के लिए यहां क्‍लिक करें >

हिन्‍दी में उत्‍तर-मैट्रिक अध्‍ययन हेतु गैर-हिन्‍दी भाषी राज्‍यों के छात्रों के लिए छात्रवृत्‍ति स्‍कीम

यह स्‍कीम वर्ष 1955-56 में आरंभ की गई थी जिसका उद्देश्‍य गैर-हिन्‍दी भाषी राज्‍यों में हिन्‍दी के अध्‍ययन को प्रोत्‍साहित करना तथा इन राज्‍यों की सरकारों को, जहां भी हिन्‍दी आवश्‍यक है वहां अध्‍यापन तथा अन्‍य पदों पर उपयुक्‍त कार्मिक उपलब्‍ध कराना है। स्‍कीम को वर्ष 2004-05 में संशोधित किया गया था। संशोधित स्‍कीम के अंतर्गत शिक्षा बोर्ड या एक विश्‍वविद्यालय या स्‍वैच्‍छिक हिन्‍दी संगठन द्वारा आयोजित ''उससे पहले की परीक्षा'' के परिणामों के आधार पर एक विषय के रूप में हिन्‍दी के अध्‍ययन हेतु शिक्षा के मान्‍यताप्राप्‍त पूर्णकालिक पाठ्यक्रम के लिए उत्‍तर मैट्रिक से पीएच.डी. स्‍तर पर अध्‍ययनरत योग्‍य छात्रों को छात्रवृत्‍तियां प्रदान की जाती हैं। अध्‍ययन के पाठ्यक्रम स्‍तर पर निर्भर छात्रवृत्‍ति की दर 300/- रू0 से 1000/-रू0 प्रति माह तक हो सकती है। यह स्‍कीम राज्‍य सरकारों/संघशासित प्रदेशों के माध्‍यम से कार्यान्‍वित की जाती है।
 

 

 

 
 

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प्रख्यान :-

नेट पर प्रकाशित की जा रही विषय-वस्तु में भूलवश हुई किसी भी त्रुटि के लिए न ही तो एन.आई.सी. और न ही उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय जिम्मेदार है।