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बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं/अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भारत
सरकार के ''तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम'' को दिसम्बर, 2002 में
शुरू किया जिसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में किए जा रहे प्रयासों
को बढ़ाना और सहयोग देना तथा संस्थाओं की विद्यमान क्षमताओं को बढ़ाना है ताकि
वे राष्ट्रीय और
अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर हो रहे तीव्र आर्थिक
और प्रौद्योगिकीय विचारों के प्रति सक्रिय, मांगानुकूल कोटिपरक सक्षम और भविष्य की ओर देखने वाले बन सके। परियोजना प्रथम सत्र राज्यों के लिए मार्च,
2003 में तथा द्वितीय सत्र राज्यों के लिए जुलाई, 2004 में प्रभावी हुई
परियोजना की समाप्ति तिथि 30 जून, 2008 है।
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तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम
एक केन्द्रीय तथा राज्य क्षेत्रीय परियोजना इस कार्यक्रम की कुल लागत 1550
करोड़ रू. है इसमें से 350 करोड़ रू. केन्द्रीय घटक हैं। (335 करोड़ रू.
केन्द्रीय रूप से वित्तपोषित संस्थाओं तथा 15 करोड़ रू. एनपीआईयू
के लिए तथा
1200 करोड़ रू. राज्य घटक के हैं। इस समय 127 संस्थाएं तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता
सुधार कार्यक्रम में भाग ले रही है जिसमें से 18 केन्द्रीय रूप से वित्तपोषित संस्थाएं तथा 109 राज्य संस्थाएं हैं। 18 केन्द्रीय संस्थाओं में 17
एनआईटी तथा एनआईएफएफटी, राँची शामिल हैं। 109 राज्य संस्थाओं में 90
इंजीनियरिंग कॉलेज तथा 19 पालटेक्निक शामिल हैं।
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ये राज्य संस्थाएं तेरह राज्य जैसे
हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश,
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आन्ध्र
प्रदेश, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तरांचल और
पश्चिम बंगाल में
है।
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127 परियोजना संस्थाओं हेतु तकनीकी
शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के लिए संशोधित कुल आवंटन 1378 करोड़ रू. है।
तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम चरण-॥
तकनीकी शिक्षा परियोजना - ॥।
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देश में पालिटेक्निकों के प्रोन्नयन हेतु
विषश्व बैंक
की सहायता से देश में आरंभ तकनीकी शिक्षा-। तथा तकनीकी शिक्षा-॥ परियोजनाओं
के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के पश्चात सरकार ने विश्व बैंक की सहायता से तकनीकी
शिक्षा-॥। नाम से एक परियोजना आरंभ की थी तथा परियोजना का उद्देश्य अंडमान व
निकोबार द्वीप समूह, अरूणाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, मेघालय, मिजोरम,
नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा राज्यों/संघ शासित
प्रदेश में पॉलिटेक्निकों
का विकास करना था। परियोजना का लक्ष्य क्षमता विस्तार, गुणवत्ता वृध्दि तथा
कौशल सुधार करना है। परियोजना जनवरी, 2001 में प्रारंभ हुई तथा जून, 2007 में
समाप्त हुई।
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परियोजना में 9 नए पॉलीटेक्निक अरूणाचल
प्रदेश,
नागालैंड तथा त्रिपुरा में एक तथा मेघालय सिक्किम और जम्मू व कश्मीर में
दो-दो, नए पालिटेक्निक स्थापित करने के लिए 21 पालिटेक्निक
शामिल हैं।
वर्तमान 12 पालिटेक्निक अंडमान व निकोबार (2) जम्मू व कश्मीर (4) मेघालय (1)
है। परियोजना के सभी लक्ष्य नए पालिटेक्निक स्थापित करके, नए कार्यक्रम
प्रारंभ करके, महिला तथा लाभवंचित वर्ग सहित नामांकन में वृध्दि करके
प्राप्त किए गए थे। विद्यमान प्रयोगशालाओं तथा कार्यशालाओं को आधुनिकीकृत किया
गया तथा नई कार्यशालाएं और प्रयोगशालाएं स्थापित की गई थी। इंटरनेट सुविधाओं
के साथ सभी पॉलिटेक्निकों में कम्प्यूटर केन्द्र स्थापित किए गए। परियोजना के
कार्यान्वयन के दौरान आंतरिक राजस्व सृजन, संकाय तथा स्टाफ विकास और भर्ती को
प्रोत्साहन दिया गया। स्थान हेतु कठिनाईयां होने के बावजूद अधिकतर संस्थानों
ने आईएसओ 9001-2000 प्रमाणीकरण प्राप्त कर लिया था। असंगठित क्षेत्रों हेतु
प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करके विद्यमान संसाधनों का उपयोग करते हुए
पालिटेक्निक में तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए
गए।
इंडो फ्रैंच साइबर विश्वविद्यालय
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा युवा राष्ट्रीय
शिक्षा व अनुसंधान, फ्रांस
रिपब्लिक सरकार के बीच साईबर विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए 8 अप्रैल,
2003 को संगम ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। संगम ज्ञापन में अभिनिर्धारित विषय/पाठयक्रम
निम्नलिखित हैं।
Ø प्रायोगिक गणित
Ø सूचना प्रौद्योगिकी
Ø संगणक इंजीनियरी
Ø डिजाईन इंजीनियरी
Ø ऐरोनॉटिकल इंजीनियरी
Ø कंट्रोल इंजीनियरी
Ø प्रबंधन
Ø पर्यावरण
Ø फ्रेंच भाषा का अध्ययन
Ø हिन्दी भाषा का अध्यापन
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भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर तथा तूलूस
विश्वविद्यालय नेटवर्क, फ्रांस के बीच हस्ताक्षरित संगम ज्ञापन के अनुसरण में
प्रायोगिक गणित (इमेथ्स) में भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर द्वारा किए गए
कार्यों को इस साईबर विश्वविद्यालय के कार्यों के रूप में माना है।
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परियोजना का मुख्य लक्ष्य दीर्घकालिक आधार पर
गैर-व्यवसायिक आधार पर अनुंसधान विकास, शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी
हस्तांतरण तथा ज्ञान प्रसार के क्षेत्र में भारत तथा फ्रांस के बीच सूचना
प्रौद्योगिकी को समर्पित साईबर-प्लेटफार्म सृजित करना है। प्रथम चरण में
परियोजना का लक्ष्य प्रायोगिक गणित में स्नातकोत्तर स्तरीय पाठयक्रमों को
विकसित व वितरित करने पर ध्यान देना है।
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भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर आज तक की स्थिति के
अनुसार निर्देश के माध्यम के रूप में अंग्रेजी में निम्नलिखित सात पाठयक्रम
संचालित कर रहा है जिसमें भारतीय तथा फ्रांसिसी छात्रों ने भाग लिया।
Ø कंट्रोल एंड होमोजेनिजेशन
Ø कम्बस्टन एंड शॉक वेब
Ø क्रिप्टोग्राफी
Ø नानली नियर एनलिसिज एंड एप्लीकेशन टू डिफरेंशियल
इक्वेशन्ज
Ø लाईनियर एंड नॉन लीनियर टाईम सीरिज एनालिजिस
Ø कम्प्यूटेषनल फ्लूड डायनिमिक्स
Ø ऑपटीमल डिजाईन
एशियन प्रौद्योगिकी संस्थान, बैंकाक
एशियन प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना 1959 में सीटो ग्रेजूयट स्कूल ऑफ
इंजीनियरी के रूप में की गई थी जिसका उद्देश्य सीटो सदस्य राज्यों की
प्रोन्नत तकनीकी शिक्षा की आवश्यकता का पूरा करना था।
वर्ष 1967 में सीटों ने
अपना नियंत्रण छोड़ दिया तथा संस्थान को एशियन प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप
में पुन: नामित किया गया तथा यह एक स्वायत्त संस्थान बन गया जिसका प्रबंधन एक
इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को सौंप दिया गया। इस समय बैंकाक में भारत के
राजदूत एशियन प्रौद्योगिकी संस्थान, बैंकाक के बोर्ड ऑफ टूरिस्ट के सदस्य
हैं।
एशियन प्रौद्योगिकी संस्थान, बैंकाक एक स्वायत्त
अंतर्राष्ट्रीय स्नातक
संस्थान है जो इंजीनियरी, विज्ञान तथा सम्बध्द विषयों में
उच्च शिक्षा प्रदान
कर रहा है। एशियन प्रौद्योगिकी संस्थान के दो सत्र हैं जो जनवरी तथा अगस्त
में शुरू होते हैं। भारत सरकार विशिष्टता वाले चुनिंदा विषयों में 16 सप्ताह
की अवधि तक भारतीय संकाय को बढ़ावा देने के रूप में प्रत्येक वर्ष 71.33 लाख
रू. की प्रतिपूर्ति करता है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार भारतीय उपकरण, पुस्तकें
और पत्रिकाओं की खरीद के लिए भी संस्थान को निधियां प्रदान करती हैं । (www.ait.ac.th)
कोलम्बो प्लान स्टाफ कालेज फॉर तकनीशियन एजूकेशन, मनीला
कोलम्बो प्लान स्टाफ कालेज फॉर तकनीशियन
एजूकेशन कोलम्बो प्लान की विशिष्ट एजेंसी है। इसकी स्थापना 5 दिसम्बर, 1973
को वेल्गिंटन, न्यूजीलैंड में आयोजित कोलम्बो प्लान की 23वीं परामर्शदात्री
समिति में की गई थी जिसका उद्देश्य कोलम्बो प्लान सदस्य
देशों को उनकी
तकनीशियन शिक्षा प्रणालियों को विकसित व बढ़ावा देने में सहायता करना है। यह
सिंगापुर सरकार द्वारा 12 वर्षों के लिए प्रथमत: जहोस्ट देश के रूप में
वर्ष
1974 में संचालित किया गया। 1986 में कोलम्बो प्लान स्टाफ कालेज फॉर तकनीशियन
एजूकेशन मनीला, फिलीपिन्स में चला गया है।
कोलम्बो प्लान स्टाफ कालेज एक विशिष्ट
संगठन है जो कि एकमात्र क्षेत्रीय संस्था है जो कि एशिया-प्रशान्त क्षेत्र
में तकनीशियन शिक्षा व प्रशिक्षण में गुणवत्ता सुधार संबंधित मामलों पर कार्य
कर रहा है। स्टाफ कालेज का उद्देश्य कोलम्बो क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा एजूकेटर व प्रशिक्षकों और तकनीशियन
शिक्षा में सीनियर स्टाफ जो सेवारत
प्रशिक्षण और स्टाफ विकास कार्यक्रमों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हैं, की
आवश्यकताओं को पूरा करके तकनीशियन शिक्षा व प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार करना
है। (www.cpsctech.org).
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